Friday, 6 September 2019

वायु प्रदूषण से हर साल 70 लाख लोगों की मौत: विशेषज्ञ

घर के अंदर की प्रदूषित हवा और बाहर के वायु प्रदूषण के कारण हर साल करीब 70 लाख लोगों की मौत हो रही है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार और पर्यावरण के जानकारों ने इस आंकड़े की पुष्टि की है। संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञ ने यह भी कहा कि प्रदूषित वायु में सांस लेने के कारण गंभीर बीमारियां हो रही हैं।

हाइलाइट्स
  • यूएन के विशेषज्ञ डेविड बोयड ने कहा, 6 अरब लोग नियमित रूप से इतनी प्रदूषित हवा में सांस ले रहे हैं
  • पर्यावरण के जानकारों का कहना है कि हर साल इससे 70 लाख लोग मर रहे हैं
  • प्रदूषित हवा के कारण मरनेवालों में हर साल लगभग 6 लाख बच्चे होते हैं

जिनिवा
संयुक्त राष्ट्र के पर्यावरण एवं मानवाधिकारों के जानकार ने कहा है कि घर के अंदर और बाहर होने वाले वायु प्रदूषण के कारण हर साल करीब 70 लाख लोगों की मौत समय से पहले हो जाती है। इनमें 6 लाख बच्चे शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञ डेविड बोयड ने कहा कि करीब छह अरब लोग नियमित रूप से इतनी प्रदूषित हवा में सांस ले रहे हैं कि इससे उनका जीवन और स्वास्थ्य जोखिम में घिरा रहता है।
पर्यावरण और मानवाधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक ने सोमवार को मानवाधिकार परिषद से कहा, 'इसके बावजूद इस महामारी पर बहुत कम ध्यान दिया जाता है। ये मौतें अन्य आपदाओं या महामारियों से होने वाली मौतों की तरह नाटकीय नहीं हैं। हर घंटे 800 लोग मर रहे हैं जिनमें से कई तकलीफ झेलने के कई साल बाद मर रहे हैं, कैंसर से, सांस संबंधी बीमारी से या दिल की बीमारी से जो प्रत्यक्ष तौर पर प्रदूषित हवा में सांस लेने के कारण होती है।'

कनाडा की ब्रिटिश कोलंबिया यूनिवर्सिटी में असोसिएट प्रफेसर बोयड ने कहा कि स्वच्छ हवा सुनिश्चित नहीं कर पाना स्वस्थ पर्यावरण के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि यह वे अधिकार हैं जिन्हें 155 देशों ने कानूनी मान्यता दी है और इसे वैश्विक मान्यता प्राप्त होनी चाहिए। उन्होंने 7 अहम कदमों की पहचान की जिसे स्वच्छ हवा सुनिश्चित करने के लिए देशों को उठाना चाहिए।

इनमें वायु गुणवत्ता और मानव स्वास्थ्य पर उसके प्रभावों की निगरानी, वायु प्रदूषण के स्रोतों का आकलन और जन स्वास्थ्य परामर्शों समेत अन्य सूचनाओं को सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध कराना शामिल है। बोयड ने कहा, ‘अच्छे चलन के कई उदाहरण हैं जैसे भारत और इंडोनेशिया के कार्यक्रम जिन्होंने कई गरीब परिवारों को खाना पकाने की स्वच्छ तकनीकों की तरफ मोड़ा है। ऐसे देश जो कोयले से चलने वाले ऊर्जा संयंत्रों के इस्तेमाल को खत्म कर रहे हैं।'

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