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Wednesday, 11 September 2019

Database क्या है और इसके Model के प्रकार


क्या आपको पता है Database क्या है (What is Database in Hindi) और डेटाबेस मॉडल के प्रकार. यह तो आपको पता ही होगा की आज की दुनिया में Data और Information की कितनी ज्यादा मांग है. Data और Information कम समय में, आपको बस Internet में धुंडने से मिल ही जाती है. बस आपको इतना सा काम करना है, Mobile के Browser में या Google Search में आपको अपने सवालों को लिखना हैं.
तुरंत कुछ seconds के अंदर आपको आपके सवालों के जवाब मिल जाएंगे. बड़े बड़े Company अपने Employees की जानकारी (Name, Salary, IDno, Address). College और Schools में पढने वाले बचों की  Information जैसे Name, Roll no, Address, City सब कुछ आज कल Internet में मोजूद है. लेकिन Internet में कहाँ मोजूद है यह बात कम लोगों को पता है. किंतु आपको जवाब जल्द ही मिल जाएगा.
अब India में जितने भी Aadhar Card बन रहें है, मेरा मतलब करीबन करोड़ों Adharcard बन चुके हैं. इन सभी की जानकारी भी Internet में तो हैं ना. Banks और Online Reservation (Train, Flight, Hotel) इनमे भी हर रोज बहुत सारा Data बदलता रहता है.
बैंक में Transaction Computer और मोबाइल के जरिए होता है. वहां भी data रहता है लेकिन Transaction भी लाखों लोगों का होता रहता है. अब आपके मन में एक ओर सवाल है. इन सब की Transactions की Details Store कहाँ होती है.
कभी कभी आप सोचते होंगे इतना सारा data और Information कहाँ रहता है. क्या Internet में कोई एसी जगह है ? या कोई आदमी बैठके लिखता है ? इन सभी का जवाब है Database. यह भी जान लो Database के बिना Internet कुछ भी नहीं है. तो चलिए आज जानते है डेटाबेस क्या होता है.
Database (DB), यह Information यानि जानकारी का संघ्रारालय है, जहाँ Related Information को Collection करके रखा जाता है. Database में Information को Organised (संगठित) करके रखा जाता है.
Organised मतलब सजा के रखना जैसे आप books को Table पे सजा के रखते हो, वैसे ही Information और data को Database में रखा जाता है. Information को Store करने के लिए, कुछ Software का इस्तमाल किया जाता है सबसे अच्छा Example है MS-Excel. यहाँ पे सारे डाटा को Digital Memory Devices में रखा जाता है जैसे Hard disk.
Information को Database में कुछ इस तरह से रखा जाता है, जिसे आप बड़ी आसानी से data को Access कर सको और Manipulate (बदलाव) कर सको.
चलो एक उदाहरण से समझते हैं “ एक MS-Excel Sheet जहाँ आप 100 Students की Details है. Details में जैसे Roll NO, नाम, पता, सहर का नाम, पिता का नाम, जन्म तिथि. यहाँ हम और आप ये बोल सकते हैं यह Excel Sheet एक Database है
DB मतलब DataBase में से जो भी Information और data है उसको आप जब चाहो तब Access कर सकते हो. अब Access मतलब क्या है चलो समझते हैं. एक University है, जहाँ बहुत सारे Students हैं, करीबन 5000 उनके Exam ख़तम हो गए हैं.
अब इनके Results को Computer के जरिये Database में Upload किया जाता है, यह भी हो सकता है की University की Official website है. तो वहां पर भी Upload किया जाता है. अब यह Students Result का database बन गया.
जब Result निकलने की date आती है तो इस result को Publish किया जाता है. तभी Students अपना Roll no डालके Result देखने में लग जाते है. इस Process को कहते हैं Database को Access करना.
ऐसे बहुत सारे हैं Database होते हैं जैसे Google का, Company का, Government का database, जहाँ वो अपने Information को Store करते हैं.

डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम

यह एक Software System है, जिसके जरिए एक user, database को Create, Define, Maintain और Control करता है. DBMS, Programs का Collection है आम तोर पे Database(DB) को Maintain करने के लिए इस्तमाल किया जाता है.
अब Maintain का मतलब समझते हैं “इसमें आप ये सब कर सकते हो जैसे Data को DB में Insert करना, Edit, Delete, Access और Update करना.
ये तो आप जान ही गए Database Management System DBMS क्या है. फिर से समझते हैं, DBMS यह एक Software package है. इस Software के जरिए आप Database को Create कर सकते हो. जैसे आप ने एक Database बनाया Student नाम का अब आपको इसमें Students के Details को add करना होगा.
अगर जाने अनजाने में गलत Data दे देते हैं, तब आपको Student details Edit करना होगा. कुछ दिन बाद आपको पता चला की किसी का डाटा गलत है तो आपको Delete भी करना पड़ेगा. किसी Students के Roll no से आपको उसका नाम और Address search करना है तो इसको बोलते हैं Access.
अब आप समझ गये होंगे की DBMS क्या क्या करता है. यही उदहारण लें आप एक Company में भी लगा सकते हो वहां भी यही होता है.

डेटाबेस के उदाहरण

वैसे तो बोहत सारे DBMS Software है, उनमे से कुछ हैं

1. Dbase

जितने भी DBMS हैं उनमे में से Dbase सबसे पहले बनाया गया था. इसका इस्तमाल Microcomputers में किया जाता था. अपने समय में यह software सबसे Successful DBMS था. DBASE में ये सारे Component रहते है जैसे Database Engine, Query system, a forms engine और तीनों को Run करने के लिए एक Programming Language का Use किया जाता है. इस File का Extension रहता है .dbf.
Ashton-Tate नाम की Company ने 1980 में Dbase को प्रकाशिर(Publish) किया था, Microcomputer के os में चलाने के लिए इस DBMS का इस्तमाल किया जाता था. बाद में इसका इस्तमाल Apple-|| और IBM PC में भी होने लगा, दोनों ही dos os पे चलते थे. कई सालों तक Dbase को Best Selling Software of the Year से भी नवाजा गया था. जब Dbase-||| Release हुआ तो ये UNIX और VMS में भी Run होने लगा.

2. FoxPro

यहाँ एक text-based procedurally oriented programming language के साथ साथ यह Database Management System भी है. यह एक Object Oriented Programming Language है. प्रथम बार Fox Software ने इसको Publish किया था.
लेकिन Microsoft ने FoxPro को आगे चल के MS-DOS, Windows और Unix version में चलने के लिए Develop किया. अभी इसका नाम है Visual FoxPro है लेकिन कुछ साल बाद 2007 में इसका Production बंद कर दिया गया.

3. IMS

IMS Database में data Store करने के लिए hierarchical model को Follow किया जाता है. जो DB2 और Relational Model से काफी भिन्न है. आमतोर पर Information Management के लिए इस DBMS का इस्तमाल होता है.

4. Oracle

Oracle को Oracle RDBMS भी बोला जाता है. यह object-relational database management system है. आज के समय में इसका बहुत ज्यादा इस्तमाल किया जाता है इस software Company का नाम है Oracle Corporation. Larry Ellison और उनके दो दोस्त इस corporation के CO-Founder थे.

5. MySql

यह एक object-relational database management system है. इसका नाम इसके CO-Founder Michael Widenius की बेटी के नाम पे रखा गया था और SQL मतलब Structured Query Language. इस DBMS Software Company का नाम है mySQL AB जिसका गठन 1995 में हुआ था. अब इसके मालिक है Oracle Corporation.

6. DB2

यह एक Database का Product है. यह RDBMS है मतलब Relational Database Management System है. DB2 का इस्तमाल Data को database में Store, Analyze और Retrieve करने के लिए किया जाता है. db2 Object Oriented के Concept को भी फोलो कर रहा है.

Database Operations

Database के उपर निचे दिए गए सारे operation होते हैं. एक एक करके Detail में इन्हें समझते हैं.

1. Insert

अगर कुछ data Store करते हैं तो उसे Insert Operation बोलते हैं. जैसे एक Student Database है वहां आप Data Insert करते हैं Name, Roll, Mark, City.

2. Delete

DATA या एक Record को Database से Delete करते हैं, तो इस Operation को Delete Operation कहते हैं. Delete करने के लिए कुछ Programming Language का भी इस्तमाल कर सकते हैं.

3. Update

जो Information या Data पहले से मोजूद है और उसमे आप बदलाव कर रहे हैं तो उसे Update कहते हैं. मै अभी भी वही उदहारण लूँगा, कोई Student की family दूसरी जगह Shift हो गई है तो आपको Database से Address बदलना होगा इसे ही Update कहते हैं.

4. Search/Access

एक ही Information को ढूंडना या Group of Information को ढूंडना इसी को Search या Access Operation कहते हैं. जैसे कोई Result देखना, Balance Inquiry करना, ट्रेन टिकट Available है या नहीं देखना यह सब एक एक Search Operation है.

डेटाबेस मॉडल के प्रकार

Database में Data Logically कैसे Store, Organised और Manipulate किया गया है और Database का Logical Structure कैसा होना चाहिए यह Data Model आपको बताता है.
आप को एक उदाहण से समझता हूँ, आपको बोला गया की आपके Familly Detalis की जानकारी लिख के लाओ. कुछ इस तरह से आप लिख सकते हो एक Table बनाके भी लिख सकते हो. दूसरा बिना table बनाए भी लिख सकते हो और तीसरा mummy पापा का नाम उसके निचे बचों के नाम और उनके निचे उनके बचों के नाम.
यह तिन जो तरीके थे ये एक एक Data Model है. वैसे ही Database Design में इन्ही तिन Models का इस्तमाल किया जाता है.
  1. Hierarchical Model
  2. Network Model
  3. Relational Model

1. Hierarchical Model


इस Model का Structure Tree Structure जैसे दीखता है. इस Model में Records को अपसा में जोड़ने के लिए Tree Structure को Follow किया जाता है. Tree में Nodes और Branches होते हैं.
इसका मतलब जैसे पेड़ के सखा होते हैं वैसे ही इसमें भी होते हैं. यह Tree ही Database के Logical Structure को Represent करता है. निचे इस Model का एक Structure है.

2. Network Model


Network Model तो वैसे काफी Powerful है लेकिन Complicated भी है. क्यूंकि इसमें सारे Nodes/Table आपस में Linked रहते हैं. इस Model को Graph Structure में Represent कर सकते हैं. Department, Student, Course और Professor या चरों आपस में कैसे Linked है आप निचे देख सकते हो.

3. Relational Model



यह model बहुत powerful और simple है. बहुत ज्यादा Flexible और Natural है. इस Data Model का Structure Table जैसे ही होता. Table को Database की भाषा में Relation कहते हैं. इसीलिए इसका नाम भी Relational Model हैं. यह Table जैसे होता है, इसलिए इसमें Rows और Column होते हैं.
Relational Model में Rows को Record कहते हैं और Column को Field कहते हैं. इस Model का प्रस्ताव E. F Codd दिए थे जब वो IBM में थे. इस Model में Unique Field को Key कहते हैं. और इन Keys के जरिए Tables को आपस में Connect किया जाता है. एक Student Table में Roll no, Primary key होती है.

Databse के Components

मुख्य तिन Component होते हैं एक

1. Database User

यह वो User है जो DB को कहीं से भी Access करता है और सर्च करता है. जैसे आप भी एसे ही User हैं, Google में कुछ सर्च कर लेते हैं, पढने के बाद पढ़ लेते हैं. किंतु अंदर क्या है और कैसे Store किया गया है उसकी जानकारी आपके पास नहीं होती.

2. DBA

DBA का Full Form है Database Administrator, इसको Manager कहते हैं. जो पुरे System चलता है. ये User की Needs को समझता है और उसके हिसाब से Manage और Update करता है.

3. Application Program

यह DBMS Software Program है. इसको पुरे DB को Manage करने के लिए इस्तमाल किया जाता है. DBMS क्या है इसकी जानकारी मिल ही जाएगी उपर देखेंगे तो. ये थी कुछ जानकारी Components के बारे में.

मेरी अंतिम राय इस लेख पे

मेरी यही कोशिश रहती है की आपको इस लेख डेटाबेस क्या है – What is Database in Hindi की पूरी जानकारी आपको मेरे एक ही लेख में मिल जाए. आज आप सिख ही गए हैं डेटाबेस सिस्टम क्या है और Database Model in Hindi. थोडा अछे से समझाने के लिए कुछ Example लेके आपको समझाने की कोसिस किआ है.

Computer Virus क्या है और इसे ख़तम करने का तरीका


क्या आप जानने को इच्छुक हैं की कम्प्यूटर वायरस क्या है (Computer Virus in Hindi)? Computer का इस्तेमाल करना तो सभी लोगों को आता है और जो लोग computer का इस्तेमाल करते हैं उन्होंने virus का नाम जरुर सुना होगा.
वायरस (Virus in Hindi), ये नाम Internet की दुनिया में बहुत ही परिचित नाम है. इसके साथ ये बहुत ही डरावना नाम भी है क्यूंकि ये आपके Computer और दुसरे electronic gadgets के लिए बहुत ही हानिकारक है. यानि की यदि ये एक बार system के भीतर घुस जाये तब ये उसे ख़राब भी कर सकता है और साथ में आपके data को नष्ट भी कर सकता है.
ठीक जैसे हमारे स्वास्थ्य के लिए Virus ठीक नहीं है और ये हमारे शरीर में कई बीमारी फैलाते है ठीक उसी तरह से ये Virus भी Computer System में कई नुकशान पहुंचाते हैं. इसलिए इनके विषय में जानकारी रखने में सभी computer users की भलाई है.
Computer Virus इन हिंदी के बारे में बहुत लोगों को कुछ न कुछ पता भी होगा की वो क्या है और क्या करता है. लेकिन ऐसे भी बहुत से लोग हैं जिन्होंने virus का नाम तो सुना होगा लेकिन virus आपके computer में क्या कर सकते हैं ये उन्हें पता नहीं होगा.
इसलिए आज मैं इस लेख में आपको वायरस क्या होता है और वायरस को ख़त्म करने का तरीका के बारे में बताने वाली हूँ. उम्मीद है की ये लेख पढ़कर आपको बहुत कुछ जानने को मिलेगा.

कंप्यूटर वायरस क्या है – What is Computer Virus in Hindi

Computer Virus एक छोटा software प्रोग्राम है जिसे आपके computer के operation को और computer के data को delete करने या फिर हानी पहुचने के लिये बनाया गया है.
Computer virus हमारे जानकारी के बिना ही System को इस तरह ख़राब कर सकते हैं जिसे ठीक कर पाना हमारे बस की बात नहीं होती. computer बहुत सारे software programs से ही चलता है बिना किसी program के computer काम नहीं कर सकता है.
Software programs computer को सही तरह से काम करने के लिए बनाये जाते हैं और कुछ program computer के काम को बिगाड़ने के लिए भी बनाये जाते हैं.
Computer का अविष्कार इंसान ने किया, computer को चलने के लिए उसके program को इंसान ने ही बनाया और जैसा की मैंने कहा की virus भी एक छोटा program है उसे भी इंसान ही बनाया है. Computer virus natural नहीं है ये अपने आप से नहीं बनते, इसे भी programmers ही जान बुझ कर बनाते हैं ताकि वो दुसरे computers को ख़राब कर सकें.
या हम ये भी भी कह सकते हैं Virus असल में computer programs ही होते हैं जी की productive न होकर destructive होता है. इसका मूल उद्देश्य सहायता पहुँचाने के जगह पर क्ष्यती पहुँचाना होता है.

कंप्यूटर वायरस का इतिहास

Robert Thomas, वो सबसे पहले engineer थे जिन्होंने BBN Technologies में काम करते वक़्त सबसे पहले computer virus को develop किया सन 1971 में.
इस पहले virus का नाम रखा गया “Creeper” virus, और ये एक experimental program था जिसे की Thomas जी खुद किया था ARPANET के mainframes को infect करने के लिए. ये Virus system को infect करने के बाद ये निम्नलिखित message screen पर display करता था, “I’m the creeper: Catch me if you can.”
जिस original wild computer virus को सबसे पहले track किया गया था पुरे computer virus के history में वो था “Elk Cloner.” ये Elk Cloner ने पहले Apple II operating systems को infect किया था वो भी floppy disks के माध्यम से. इस virus को develop किया था Richard Skrenta ने सन 1982 में, जो की उस समय एक teenager था.
माना की computer viruses को prank के हिसाब से design किया गया था, लेकिन इससे ये मालूम पड़ता है की एक malicious program को अगर computer के memory में install कर दिया जायेगा तब ये ऐसे बहुत से काम कर सकता है जो की user को system चलाने से आगे रोक भी सकता है और उनका इन malicious program के ऊपर थोडा भी control नहीं रहेगा. .
इन Malicious Programs को “Computer Virus” का नाम देने वाला सबसे पहला व्यक्ति था Fred Cohen, जिन्होंने सन 1983 में ये नाम रखा था. ये नाम तब सामने आया जब उन्होंने अपने एक academic paper में इन programs का नाम titled किया था “Computer Viruses – Theory and Experiments” जहाँ की उन्होंने इन malicious programs के विषय में पूरी जानकारी लिखी थी जैसे की ये कैसे काम करता है, ये क्या कर सकता है इत्यादि.

कंप्यूटर वायरस क्या कर सकते हैं?

Computer virus, computer में मौजूद data को corrupt या फिर delete कर सकते हैं. आपके hard disk में store किये हुए data को पूरी तरह से ख़तम कर सकते हैं. computer virus e-mail attachments के जरिये दुसरे computers में भी जा कर उनके computers को ख़राब कर देते हैं.
Virus आपके computer की speed को बहुत धीमा कर देता है. ये आपके files और program को नष्ट कर देता है.

Malware क्या है – What is Malware in Hindi

Malware का पूरा नाम है malicious software. ये भी एक software प्रोग्राम है जो computers को हानी पहुचता है. Malicious software का मतलब है ख़राब software जो की बिलकुल भी ठीक नहीं है और एक बार ये आपके system में आ गया तो ये आपके system को पूरी तरह से ख़राब कर सकता है.
Malware भी एक virus का नाम है जो आपके system के data को धीरे धीरे ख़तम करने लगता है.
Malware हमारे computer में आते कहाँ से हैं? malware हमारे system में बहुत सी जगहों से आ सकता हैं और आज के दिन में जो सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है जो common source है वो है internet.
Internet पर हम रोज कुछ ना कुछ जानकारी हासिल करते हैं. अगर हम वोही जानकारी हासिल करने किसी भी malicious site पर चले गए या कहीं से pirated software, games और movies download कर लिया तो वहां से ही malware online हमारे computer में आ जाते हैं.
ये तो थी online malware हमारे computer में कैसे आ जाते हैं उसके बारे में, अब हम जानेगे की offline malware हमारे computer में कैसे आ जाते हैं.
हम सब अपने computers में Pendrive, CDs, DVDs का इस्तेमाल करते हैं.हम Pendrive और CDs दुसरे जगह से लाकर data लेने के लिए जब अपने computer में कनेक्ट करते हैं तब malware इन सभी चीजों से हमारे computer में आ जाते हैं और हमारे computer के data को नष्ट कर देते हैं.

Malware के प्रकार

Malware तिन प्रकार के होते हैं- Virus, Worms और Trojan horse. ये तीनो अलग हैं इनका काम भी अलग अलग हैं. ये तीनो अलग अलग तरह से आपके computer को ख़राब करते हैं. चलिए हम इन तीनो के बारे में जानते हैं की ये क्या करते हैं.

वायरस क्या होता है – What is Virus in Hindi

Virus आपके computer में मौजूद files और software को corrupt कर सकता है. मान लीजिये आपके system में एक word का document है जिसमे virus आ गया है, तो ये आपके document के data को delete कर देगा या फिर उस document को corrupt कर देगा जिससे आपको उससे कोई information नहीं मिल पायेगा.
या फिर ऐसा भी हो सकता है की ये virus आपके word processing software को ही पूरी तरह से corrupt कर सकता है. ऐसे में अगर आप किसी corrupted file को क्पोय करते हैं या share करते हैं तो ये virus दुसरे computer में जाकर उसके system को भी ख़राब कर देता है.

वायरस के प्रकार

Computer virus एक प्रकार का malware होता है जो की अगर computer के memory में घुस गया तब ये खुद को अपने आप multiply कर सकता है और programs, applications को बदल भी सकता है.
यहाँ computer infect होते हैं जब ये malicious code खुदबखुद replicate होते रहते हैं. यहाँ पर में आप लोगों को इन Computer Viruses के Types के विषय में जानकारी प्रदान करने वाला हूँ.

Boot Sector Virus

इस प्रकार के virus master boot record को infect करते हैं और इन्हें निकाल पाना बहुत ही मुस्किल कार्य होता है और अक्सर इन्हें निकालने में System को Format करना पड़ता है. ये मुख्य रूप से removable media के द्वारा फैलते हैं.

Direct Action Virus

इन्हें non-resident virus भी कहा जाता है, एक बार ये install हो जाने पर ये computer memory में hidden होकर रहता है. ये उन specific type के files के साथ attach होकर रहता है जिन्हें की ये infect करता है. ये user experience और system’s performance को infect नहीं करते हैं.

Resident Virus

Direct action viruses, के तरह ही resident viruses भी computer में install हो जाते हैं. इसके अलावा इन्हें identify करना भी उतना ही मुस्किल काम होता है.

Multipartite Virus

इस प्रकार के virus multiple ways से system को affect कर सकते हैं. ये दोनों boot sector और executable files को एक साथ infect करते हैं.

Polymorphic Virus

इस प्रकार के viruses को identify करना बहुत ही मुस्किल बात है एक traditional anti-virus program के लिए, क्यूंकि ये virus अपने signature pattern को बार बार बदलते हैं जब भी ये खुद को replicate करते हैं.

Overwrite Virus

इस प्रकार के virus सभी files को delete कर देते हैं जिन्हें ये infect करते हैं. इन virus को system से निकालने के लिए user को सभी infected files को delete करना पड़ता है जिससे data loss होता है.
इन virus को पहचानना बहुत ही मुस्किल बात है क्यूंकि ये emails के माध्यम से spread होते हैं.
Spacefiller Virus – इन्हें “Cavity Viruses” भी कहा जाता है. इन्हें यह नाम इसलिए दिया गया है क्यूंकि ये code में स्तिथ सभी spaces को भर देती है इसलिए ये files को नुकशान नहीं पहुंचाती है.

File infectors Virus

कुछ file infector viruses program files के साथ attach होकर आते हैं, जैसे की .com or .exe files. कुछ file infector viruses .sys, .ovl, .prg, and .mnu वाले files को भी infect करते हैं.
ठीक वैसे ही जब कोई particular program भी load होता है वहीँ virus भी अपने आप load हो जाता है. ये virus email के साथ users के computer में आ जाते हैं.

Macro viruses

जैसे की नाम में suggest है ये macro viruses मुख्य रूप से macro language commands को ही target करता है जैसे कुछ applications में जैसे Microsoft Word.
इन macro viruses को कुछ इसप्रकार से designed किया गया है जिससे की ये अपने malicious code को आसानी से genuine macro sequences में add कर देता है.

Overwrite Viruses

ये virus को कुछ ऐसा design किया गया है जिससे की ये खुद को overwrite कर किसी भी file या application data को destroy कर सकता है. ये एक बार attack start करने पर खुद के code को overwrite करने लगता है.

Polymorphic Viruses

इस प्रकार के virus का इस्तमाल ज्यादा cybercriminals किया करते हैं. ये एक ऐसा प्रकार का malware type जो की आसानी से अपनी underlying code को change या mutate कर सकता है और तो और बिना किसी basic functions या features को बदले.
इससे ये किस anti-malware के चपेट में भी नहीं आता है. जब भी कोई anti malware इसे detect करता है तब ये खुद को modify कर देता है जिससे इसे पकड़ पाना बहुत ही मुस्किल हो जाता है.

Resident Viruses

ये virus खुद को computer के memory में implant कर देता है. Basically, infection के लिए original virus program की कोई जरुरत ही नहीं होती है किसी files या program को infect करने के लिए. अगर कभी original virus को delete भी कर देते हैं तब भी इसका एक version memory में store हुआ होता है जो की खुद्बद्खुद activate हो जाता है.
ऐसा तब होता है जब computer OS कुछ applications या functions को load करते हैं. चूँकि ये system के RAM में hidden होता है इसलिए इसे अक्सर कोई भी antivirus या antimalware detect नहीं कर पाते हैं.

Rootkit Viruses

ये rootkit virus एक प्रकार का malware type होता है जो की secretly एक illegal rootkit को install कर देता है infected system में. इससे ये एक दरवाजा खोल देता है attackers के लिए जो की उन्हें system के ऊपर full control प्रदान करते हैं.
इससे attacker बड़ी आसानी से fundamentally किसी program या function को modify या disable कर सकते हैं. ये rootkit virus बड़े आसानी से antivirus software को bypass कर सकते हैं. इन्हें पकड़ने के लिए Rootkit scanner की जरुरत होती है.

System या Boot-record Infectors Viruses

ये Boot-record Infectors executable code को infect करते हैं जिन्हें की disk के specific system areas में पाया जाता है. जैसे की नाम से पता चलता है ये USB thumb drives और DOS boot sector में ज्यादा infect करते हैं.
ये Boot viruses को आजकल ज्यादा देखने को नहीं मिलता है क्यूंकि अभी के system ज्यादा physical storage media पर निर्भर नहीं करते हैं.

What is Worms in Hindi

Worms भी virus की तरह ही होते हैं लेकिन ये अपने आपको multiply करते हैं और अपने आपको ज्यादा से ज्यादा फ़ैलाने की कोशिश करते हैं. जिसका मतलब है की अगर आपके system में worms आ गया तो वो अलग files की बहुत सारे copies बनाना शुरू कर देते हैं जिसके वजह से system slow हो जाता है.
अगर उसी files को हम कॉपी कर दुसरे computer के साथ share करते हैं तो worms वहां भी जाकर files की बहुत सारी copies बनाकर उस computer को भी slow कर देगा.

What is Trojan Horse in Hindi

Trojan Horse एक बहुत ही dangerous malware है. ये malware आपके computer में अपनी पहचान छुपा कर आते हैं.
जैसे मान लीजिये आप internet का इस्तेमाल कर रहे हो और आप किसी site पर visit किये हो वहां आपको कोई add दिखा जैसे की “click here to win smartphone” और आप उस पर click कर दिए तो trojan horse malware आपके computer में उसके जरिये ही आ जायेगा और आपको इसकी खबर भी नहीं होगी और आपका system पूरी तरह से ख़राब कर देगा.
ये बहुत सारे software के रूप में भी internet पर मौजूद रहते हैं आपको लगेगा की वो genuine software है मगर असल में वो एक trojan रहता है जो उस software के अन्दर छुपा हुआ रहता है और एक बार ये आपके computer में आ गए तो ये आपके computer को slow करना शुरू कर देते हैं. उसके साथ ही वो एक दरवाजा खोल देते जिससे और भी तरह तरह के virus और worms आपके computer में आ जाते हैं.

System में Virus Infection के Signs

कैसे जानें की आपका System Virus से infected हैं भी या नहीं. इसीलिए यहाँ में निचे कुछ warning signs के विषय में बताने जा रही हूँ जो की सभी computer users के लिए जानने बहुत जरुरी है –
  1. Slower system performance का होना
  2. Screen में बार बार Pop-ups का आना
  3. Programs का खुदबखुद चलना
  4. Files का अपने आप multiplying/duplicating होना
  5. नए files और programs का अपने आप computer में install हो जाना
  6. Files, folders या programs का अपने आप delete और corrupt हो जाना
  7. Hard drive से अजीब सा sound आना
अगर आपके system में ऐसे warnings दिखाए तब आपको जान लेना चाहिए की आपका system virus के द्वारा infect हो सकते हैं. इसलिए जल्द ही एक अच्छा सा antivirus software download कर scan कर लें.

कैसे खुद के System को Viruses और Worms से बचाएँ

यहाँ में आप लोगों को कुछ ऐसे tips देने जा रही हूँ जिससे की आपको इन virus से बचने में आसानी होगी.
क्या करना चाहिए
1. अपने System में हमेशा एक अच्छा सा Antivirus install करें और उसे समय समय पर update करते रहें.
2. कोई भी email यदि आपको उसके sender के विषय में जानकरी नहीं है तब उसे open नहीं करना चाहिए.
3. Unauthorized Websites से कुछ भी download न करें जैसे की MP3, Movies, Software इत्यादि.
4. सभी Downloaded चीज़ों को अच्छे से scan करवाएं. क्यूंकि इनमें virus होने के ज्यादा संभावनाएं होती है.
5. Removable Media जैसे की pendrive, disks को स्कैन करने के बाद ही इस्तमाल करें.
6. यदि आप किसी भी website पर visit करते हो तो आप एक चीज का ध्यान रहे की वो एक popular और registered website हो और ऐसी किसी भी link पर click ना करें जिससे बाद में आपको परेशानी का सामना करना पड़े.
क्या नहीं करना चाहिए
1. कभी भी किसी email attachment को न खोलें जिसे अगर आपको उस sender के विषय में जानकरी नहीं हो.
2. किसी भी unsolicited executable files, documents, spreadsheets, को बिना scan किये खोलने की कोशिश न करें.
3. Untrusted Websites से documents या executable software download न करें.
4. जो Ads आपको लालच देते हो की यहाँ पर click करो और lottery जीतो तो ऐसे adds पर कभी भी click मत करिए. ऐसे ही तरह की लालच हमे e-mails में भी आते हैं तो आप उस mail को भी कभी मत खोलिए क्यूंकि उसमे भी malware के होने का chances ज्यादा रहता है.

आज आपने क्या सीखा

मुझे उम्मीद है की आपको मेरी यह लेख कंप्यूटर वायरस क्या है – What is Computer Virus in Hindi जरुर पसंद आई होगी. मेरी हमेशा से यही कोशिश रहती है की readers को वायरस के प्रकार के विषय में पूरी जानकारी प्रदान की जाये जिससे उन्हें किसी दुसरे sites या internet में उस article के सन्दर्भ में खोजने की जरुरत ही नहीं है.

Saturday, 31 August 2019

कंप्यूटर के बारे में 10 रोचक तथ्य और दिलचस्प बातें


आज मैं आपको computer के बारे में कुछ ऐसे facts बताने वाला हूँ जिन्हें पढ़कर आप कंप्यूटर के बारे मैं बहुत कुछ जान जायंगे। कंप्यूटर का इस्तेमाल दुनिया में अब कुछ ज्यादा ही होने लगा है 

क्युकी इससे हम घर बैठे बहुत से काम कर सकते है। जिसकी वजह से आज देश के युवाओं को नौकरी के लिए देश भर भटकना नहीं पड़ता है। वैज्ञानिको की बनाई हुई ये मशीन आज सभी के लिए मददगार साबित हो रही है।
कंप्यूटर को हम अपनी भाषा मैं एक व्यापार मशीन भी कह सकते है। कहते है की कंप्यूटर की खोज Charles Babbage ने की थी। कंप्यूटर की वजह से ही Charles Babbage को father of computer कहा जाने लगा।
कंप्यूटर की इन सभी खास वजहों से आज मैंआपको बता रहा हूँ कंप्यूटर के बारे मैं कुछ अच्छी बाते। जिन्हें पढ़कर आप कंप्यूटर के बारे मैं बहुत कुछ जान सकते है।
विषय - सूची

Computer Ke Bare Me 10 Interesting Facts Hindi Me

कंप्यूटर को शुरुवात से ही लोगो ने अपनी पसंद बना लिया था और आज भी कही बिछड़े हुये गाँवों मैं कंप्यूटर जैसे उपकरणों को देखते ही लोगो की भीड़ जमा हो जाती है। आज दुनिया का बहुत सा काम और पैसो का लेना देना ज्यादातर कंप्यूटर से ही ऑनलाइन हो जाता है। आइये कंप्यूटर के बारे में कुछ रोचक और दिलचस्प बातें पढ़ते है।
  1. कंप्यूटर का सबसे पहला अविष्कार 19 वीं सदी मैं हुआ था वो भी Charles Babbage के हाथो से इसकी वजह से उनको कंप्यूटर का पिता कहा जाता है। जिन्होंने 19 वीं सदी मैं एक यांत्रिक कंप्यूटर का अविष्कार किया था।
  2. एक औसत के मुताबिक एक आदमी 1 मिनट में अपनी आँखे 25 बार झपकाता है और अगर कोई भी व्यक्ति जब कंप्यूटर के सामने बैठकर काम करता है तो वो अपनी पलके 10 बार भी झपका नहीं पाता है।
  3. Eniac जिसका सही और पूरा नाम था ( Electronic Numerical Integrator And Computer ) ये इलेक्ट्रोनिक कंप्यूटर इतना बड़ा था जो 1800 वर्ग फुट जगह में समाता था जिसका वजन 27 टन बताया गया था
  4. अगर एक कंप्यूटर में इंसान के दिमाग के बराबर क्षमता बन जाये तो वो कंप्यूटर एक सेकण्ड के हिसाब से 38 हजार खरब गणना कर सकता है जो टेराबाइट्स को डाटा में बदलने में सक्षम हो जाता है
  5. आईबीएम ने 1980 में एक डेस्कटॉप कंप्यूटर का अविष्कार किया था जिसका माडल 5120 रखा गया था। उस कंप्यूटर का भार 105 पाउंड था जिसके बाहर का फ्लोफी ड्राइव 130 पाउंड था।
  6. 1980 में कंप्यूटर के keyboard का अविष्कार किया गया था। कंप्यूटर चलाते समय सबसे ज्यादा हम माउस को यूज करते है जिसे शुरुवात में Doug Engelbart ने 1964 में सर्वप्रथम लकड़ी का बनाया था।
  7. 1970 में सबसे पहली फ्लोफी डिस्क का अविष्कार किया गया था उस डिस्क की क्षमता मात्र 75.79 KB थी। 1980 में सबसे पहले मोंनिटर  का प्रयोग किया गया था।
  8. अंग्रेजी भाषा में एक शब्द आता है Compute जिस नाम का अर्थ होता है किसी भी चीज की गणना करना और इसी नाम से कंप्यूटर नाम का अविष्कार हुआ था। आज कंप्यूटर की सहायता से दुनिया के सारे पैसे की रखवाली की जा रही है
  9. दोस्तों हार्ड डिस्क में हम अपनी कोई भी जरुरी चीज सेफ्टी रख सकते है जो हमारे लिए बहुत फायेदेमंद है और सबसे पहली हार्ड डिस्क का अविष्कार 1979 में किया गया था जो केवल 5 MB डाटा ही कवर कर सकती थी।
यदि आपको computer में ये 10 मजेदार बातें पसंद आये और आपको इनसे कुछ सिखने को मिले तो इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ सोशल मीडिया पर share जरुर करें ताकि आपकी वजह से कोई और भी computer के बारे में रोचक जानकारी जान सके।

10 सिक्रेट कंप्यूटर टिप्स् एंड ट्रिक्स: नहीं जानेंगे तो नहीं बन पाएंगे पॉवर यूजर

Computer Tips Tricks Hindi.

Hindi Computer Tips:

कई कट्टर कंप्यूटर यूजर्स को लग सकता हैं की, उन्‍हे अब नई ट्रिक सीखने की जरूरत नहीं हैं, लेकिन कंप्‍यूटर में हमेशा सीखने के लिए नई चीजें होती हैं जो आपके स्‍कील को बेहतर बनाने में मदद करती हैं।
मेरी शर्त हैं इस आर्टिकलमें आपको कम से कम एक उपयोगी ट्रिक मिलेगी, जिसे आप पहले नहीं जानते थे।
मेरा अंतिम लक्ष्य है की आप अपने वर्कफ़्लो से हर एक मूल्यवान सेकंड सेव करने के लिए अधिक प्रॉडक्टिव बनें।
ये छोटे, लेकिन अभी तक अव्यक्त विंडोज टिप्स और ट्रिक्स आपके वर्कफ़्लो में बहुत बड़ा अंतर कर सकते हैं- और प्रोसेस में आपका बहुत समय बचा सकते हैं।
बेशक, आप हमेशा इन Computer Tips Tricks Hindi को फ्रेंडस् और फैमेली मेंबर्स के साथ शेयर कर सकते हैं ताकि वे भी बेहतर पीसी यूजर्स बन सके।


PC Tips and Tricks in Hindi:

Computer Tricks and Secrets in Hindi:

1) Problem Steps Recorder:

Problem Steps Recorder का उपयोग करें यह आसान टूल ऑटोमेटिक किसी भी माउस क्लिक को रिकॉर्ड करता है और आपके लिए स्क्रीनशॉट लेता है।
यदि आपको अपने कंप्यूटर के लिए टेक्‍नीकल हेल्‍प चाहिए, तो Windows + R टाइप करके Run कमांड ओपन करें और फिर इसमें “psr” टाइप करें और Enter करें।
इस टूल से अपने पीसी के प्रॉब्‍लम को रिकॉर्ड कर आप इस इनफॉर्मेशन को टेक्‍नीकल पर्सन को भेज सकते हैं, जो आपको इसे सॉल्‍व करने के लिए आपकी मदद कर सकता हैं। इससे उनके लिए इस प्रॉब्‍लम का हल खोजने में आसानी हो जाएगी।

2) Find/Delete Large Files:

बड़ी फाइलें आपके पीसी के मूल्‍यवान स्‍पेस की ज्‍यादा खपत करती हैं। यदी आप यह जानना चाहते हैं की आपके पीसी पर कौनसी फाइलों की साइज बड़ी हैं तो आपको थर्ड पार्टी टूल WinDirStat (Windows Directory Statistics) का इस्‍तेमाल करना होगा, जो आपको बताएगा की पीसी पर कौनसे फाइल्‍स और फोल्‍डर्स ज्‍यादा स्‍पेस ले रहें हैं। इसके बाद यदी वे काम के नहीं हैं, तो आप इन्‍हे डिलीट कर अपने पीसी की स्‍टोरेज कैपेसिटी को बढा सकते हैं।

3) Remove Unnecessary Startup Programs:

स्टार्टअप प्रोग्राम पीसी के स्‍टार्ट होने के साथ ही ऑटोमेटिक स्‍टार्ट हो जाते हैं। इनमें कुछ प्रोग्राम जरूरी होते हैं और कुछ नहीं होते।
यदि आपका पीसी स्‍लो बूट हो रहा हैं, तो इसकी वजह शायद स्‍टार्टअप में कई सारे प्रोग्राम्‍स हो सकती हैं। जो प्रोग्राम्‍स जरूरी नहीं हैं, उन्‍हे स्‍टार्टअप से निकाल कर आप अपने पीसी के बूट टाइम को बढा सकते हैं।
Windows key + R किज प्रेस कर Run कमांड ओपन करें।
इसमें “msconfig” टाइप करें और एंटर करें।
अब एक विंडो ओपन होगी, जिसमें Startup टैब पर क्लिक करें।
विंडोज 10 में Task Manager में जाएं।
यहां पर आप जिस प्रोग्राम की आवश्‍यकता नहीं हैं उसे राइट क्लिक कर डिसेबल कर सकते हैं।
डिसेबल करने से पहले यह सुनिश्चित करें की आप कोई सिस्‍टम प्रोग्राम या एंटीवायरस को डिसेबल तो नहीं कर रहें हैं।
  

4) Launch Taskbar Programs With Your Keyboard

हम में से ज्‍यादातर यूजर्स टास्कबार को एक क्विक लॉन्च बार के रूप में उपयोग करते हैं। जो प्रोग्राम्‍स आपको हमेशा लगते हैं, जैसे की आउटलूक, एक्‍सेल या क्रोम आदि को आप अपने टास्‍कबार पर रखते हैं, ताकि आप उन्‍हे तूरंत लॉन्‍च कर सके।
टास्‍कबार से इन प्रोग्राम को आप सिर्फ एक क्लिक से लॉन्‍च्‍ कर कसते हैं। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि आप उन्‍हे और भी फास्‍ट लॉन्‍च कर सकते हैं? कैसे? कीबोर्ड शॉर्टकट से।
Start बटन के दाईं ओर आपके द्वारा रखे गए सभी प्रोग्राम्‍स के शॉर्टकट होते हैं।
Start से सबसे पहले प्रोग्राम का नंबर 1, दूसरे का 2 और इसी तरह बाकी प्रोग्राम्‍स के नंबर्स होते हैं

यदी आपको पहला प्रोग्राम लॉन्‍च्‍ करना हैं, तो कीबोर्ड से Win + 1 किज प्रेस करें और इसी तरह से दूसरे के लिए Win + 2 किज प्रेस करें।

5) Copy A File Path To The Clipboard:

कई बार आपको किसी फ़ाइल का पाथ कॉपी करना पड़ता हैं। जैसे की आपको अपने फोटो को फेसबुक पर अपलोड करना होता हैं या किसी डॉक्‍युमेंट को ईमेल में अटैच करना होता हैं। ऐसे समय आपको अपने फाइल के लोकेशन तक ब्राउज़ करना पड़ता हैं।
यदि अटैच के लिए ब्राउज़ करते समय आप इस फ़ाइल के पाथ को कॉपी कर पेस्‍ट कर देंगे तो आपका उस फ़ाइल को ब्राउज़ करने का काफी समय बच सकता हैं।
विंडोज एक्सप्लोरर में अपने फोटो या डॉक्‍यूमेंट को ओपन करें।
Shift कि को प्रेस करते हुए फ़ोटो या डॉक्‍यूमेंट पर राइट-क्लिक करें।

Context मेनू में Copy as path ऑप्‍शन पर क्लिक करें। यह इस फ़ाइल के लोकेशन को क्लिपबोर्ड पर कॉपी करता हैं।
अब, अपने ब्राउज़र में, फेसबुक या ईमेल कहीं भी अपलोड टूल में ब्राउज़ पर क्लिक करें।
अब फ़ाइल के लोकेशन में Ctrl-V कि प्रेस कर इस पाथ को पेस्‍ट करें और OK करें।

6) Remove Duplicate Files:

हर दिन आप अपने पीसी पर कुछ फाइलों और फोल्‍डर्स को बनाते हैं, डाउनलोड करते हैं या कॉपी करते हैं। लेकिन समय के साथ जाने या अनजाने में कई सारी डुप्लिकेट फ़ाइले बन जाती हैं, जो आपके हार्ड डिस्‍क स्‍पेस की खपत करती हैं।
आप इन डुप्लिकेट फ़ाइलों को सर्च कर डिलीट करेंगे तो आपके पीसी की काफी सारी स्‍पेस को आप बचा सकते हैं।
Computer Tips Tricks Hindi.

7) Add Mouse-Friendly Checkboxes To Icons:

प्रत्येक कंप्‍यूटर गीक कसम खाता कि वह सभी काम कीबोर्ड शॉर्टकट्स द्वारा करेगा, लेकिन अभी भी दर्जनों यूजर्स हैं जो अपने माउस पर भरोसा करते हैं।
आइकॉन चेकबॉक्स को एक्टिवेट करने पर आप एक्‍सप्‍लोरर में एक साथ कई सारी फाइलों को बिना Ctrl बटन प्रेस किए आसानी से सिलेक्‍ट कर सकते हैं।
Control Panel में Folder Option में जाएं।
View टैब में “Use check boxes to select items” को सिलेक्‍ट करें। अब Apply पर क्लिक करें।

अब आपको एक्‍सप्‍लोरर में एक साथ कई फाइल या फोल्‍डर को सिलेक्‍ट करने के लिए Ctrl बटन प्रेस करने की जरूरत नहीं हैं, बस चेकबॉक्‍स को सिलेक्‍ट करें।


8) Always Stick The Mouse Pointer To Dialog Box Button:

पीसी पर काम करते हुए न जाने कितने डायलॉग बॉक्‍स ओपन होते हैं। इन बॉक्‍स में आपको हमेशा Ok, Cancel, Save आदि बटन पर क्ल्कि करना होता हैं, जिसके लिए माउस पॉइंटर को उस डायलॉग बॉक्‍स तक लाना होता हैं।
यदि आप अपना किमती समय बचाना चाहते हैं, तो अपने माउस पॉइंटर को ऑटोमेटिकली डायलॉग बॉक्‍स तक लाए।
Control Panel में Mouse ऑप्‍शन पर क्लिक करें।
Pointers Options टैब को चुनें।
Snap To सेक्शन में Automatically Move Pointer to the Default Button को चेक करें।
अब OK पर क्लिक करें।

9) Keyboard Shortcuts:

i) Copy only active window to clipboard:

सामान्य रूप से, print screen पूरी विंडो को कॉपी करता हैं। लेकिन यदि आपको सिर्फ एक्टिव विंडो को कॉपी करना हैं, तो ALT + Print किज प्रेस करें, इससे केवल वर्तमान में एक्टिव विंडो को क्लिपबोर्ड पर कॉपी किया जाएगा।

ii) Recover Accidentally deleted file or folder with keyboard shortcut:

आप सभी CTRL + Z के उपयोग को जानते ही होंगे। इस कीज से आप किसी प्रोसेस को undo कर सकते हैं। इसे आप ज्‍यादातर वर्ड, एक्‍सेल या पॉवरपॉइंट में इस्‍तेमाल करते हैं।
लेकिन यदि एक्‍सप्‍लोरर में आपसे गलती से कोई फाइल या फोल्‍डर डिलीट हो गया हैं, तो आप CTRL + Z से फिर से पा सकते हैं।

iii) Stylish Method To Switch Between Windows:

जब आप एक से अधिक विंडोज को ओपन करते हैं और जब आपको एक विंडो से दूसरे विंडो पर जाना होता हैं, तब आप ALT + TAB किज का इस्‍तेमाल करते हैं।
यह सभी ओपन विंडोज में एक विंडोज से दूसरे विंडोज पर जाना आसान और क्विक बनाता हैं। लेकिन यदि आप एक विंडोज से दूसरे विंडोज पर जाने के लिए एक स्‍टाइलीश तरीका चाहते हैं तो Windows + TAB किज प्रेस करें।

iv) Minimize And Restore Back All Windows:

कई बार आपको सभी ओपन विंडोज को एक ही बार में Minimize करना होता हैं, तो ऐसे समय आप Windows + M किज प्रेस करते हैं। इससे सभी ओपन विंडोज Minimize हो जाते हैं।
लेकिन इस मेथड में एक कमी हैं। जब आपको फिर से उसी स्‍टेज पर जाना हो तो आप ऐसा नहीं कर सकते।
ऐसे समय आप Windows + D किज का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। इस किज से आप सभी ओपन विंडोज को एक ही बार में Minimize तो कर सकते हैं, लेकिन यही किज को फिर से प्रेस करने पर सभी ओपन विंडोज पहले की तरह Restore/Maximize हो जाते हैं।

V) Open The Task Manager Directly:

Task Manager को ओपन करने का पारंपरिक तरीका हैं कि आप CTRL + ALT + DEL किज प्रेस करते हैं और फिर Task Manager को सिलेक्‍ट करते हैं।
लेकिन CTRL + Shift + ESC किज प्रेस कर आप सिधे Task Manager को ओपन कर सकते हैं।

Vi) Close The Current Window/Tab Directly:

करंट विंडो या टैब को क्‍लोज करने के लिए अब आपको उस विंडो के X बटन तब माउस पॉइंटर ले जाने की जरूरत नहीं हैं, बस किबोर्ड से CTRL + W किज प्रेस करें और विंडो क्‍लोज हो जाएगी।

Computer Tips Tricks Hindi.

10) Web Browsing Tricks:

i) Automatically add www. and .com to a URL:

ब्राउज़र में जब आप किसी भी वेब साइट का एड्रेस टाइप करते हैं तब आपको उसका पूरा एड्रेस टाइप करना होता हैं।
लेकिन यह सच नहीं हैं, आप उस वेब साइट का नाम टाइप कर CTRL + Enter किज प्रेस करेंगे, तो उस वेबसाइट का www. और .com ऑटोमेटिक टाइप होकर वह वेब साइट ओपन होगी।
इसी तरह से .net के लिए Shift + Enter
और .org के लिए Ctrl + Shift + Enter किज प्रेस करें।

ii) Reopen Accidently deleted Tab:

जब ब्राउज़र में कई टैब ओपन होते हैं, तब गलती से दूसरा ही टैब क्‍लोज हो जाता हैं। ऐसे समय आप पिछले क्‍लोज किए गए टैब को ओपन करने के लिए CTRL + Shift + T किज प्रेस कर सकते हैं।

iii) Jump Directly To Any Tab:

जब ब्राउज़र में कई टैब ओपन होते हैं, तब आप एक टैब से दूसरे टैब पर जाने के लिए CTRL + TAB किज का इस्‍तेमाल करते हैं।
लेकिन यह फास्‍ट तरीका नहीं हैं, क्‍योकी जब आपको एक नबंर के टैब से चार नंबर के टैब पर जाना होता हैं, तब आपको CTRL + TAB चार बार प्रेस करना होगा।
इसके बजाय आप CTRL + 4 किज प्रेस कर सिधे चार नंबर के टैब पर जा सकते हैं, या CTRL + 1 से एक नंबर के टैब पर।

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